दिल का साम्राज्य बेहद विशाल
जैसे उछाल पाती समंदर की लहरे
चंचलता -स्नेह व व्याकुलता भरा
प्रेम और विरह के योग से बना
अनगिनत भावनाओं का संयोजन
यही है इस दिल के होने का प्रायोजन
यह मानव हृदय पल पल ऐसे टूटता है
एकाएक सेमल पुष्प वृक्ष से जैसे गिरता है
जीवनपर्यंत घात- आघात को पाकर
फिर भी रहता है हृदय विशालतम् ॥
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