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कवि और शायर में फर्क


कवि और शायर में फर्क होता है दिल में दर्द हजारों छुपे हों मगर

समझ नहीं सकता ये जमाना उसका दर्द

जिसके  चेहरे पर हर पल एक प्यारी सी मुस्कान होती है 

कवि भावों को  अनुभूति तथा अंतरमन की वेदना व खुशी को 

शब्दों के माध्यम से अलंकृत कर बयाँ करता है 

अौर वही शब्द लोगों के लिए एक सुंदर काव्य बन जाता है

शायर क्या जाने कविता के स्वर व भावभंगिम भावों को

जो कभी चांद तारों को तोङने जहाँ को कदमों में रखने जैसे

 शब्दों को बढा-चढाकर पेश करे माना कि गम उसे भी है 

बयाँ वह भी कर रहा है लेकिन 

एक कवि और उसकी सारगत कविता की तुलना में कोसों दूर है !!


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