मेरी स्मृतियों का सुंदर संसार
मुझे आदेशित करता मेरी आवाज
मैं चलती हूं जिस रोज उस पथ पर
जो कठिन है बेहद कठिन यकीनन
तभी तो मैं गिरती हूं शनै शनै तब
पथ दुर्गम ,बहुत कठिन लगते हैं
चूंकि मैं जानती हूं मुझमें चेतन जहाँ है
कि मुझे निर्देशित करता है मेरे कदमों को
एक संबल देता है मुझे, मेरे साथ चलने का
तब मैं खुद ही, खुद की चेतना के संग
फिर से उठ खडी होती और चल पड़ती
अपने मार्ग की ओर ,क्योंकि मुझमें छुपा है
मेरा प्राण ,मेरी चेतना, मेरा विश्वास, मेरा ईश
जो कि हर प्रतिकूलता में सदैव मेरे साथ है
यही है मेरी स्मृतियों का सुंदर संसार ।।
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