अन्याय ,अनीति,दुराचार,जब जब धरती पर ब्यापे
मानव दानव बन करके संस्कारों पर प्रश्न लगाये
धर्म गऊ का का बल घट जाये अन्यायी दल जाग उठे
धरकर नर तन ईश्वर इस धरती का मान बढ़ाते हैं
जीवों को भय,दारुण दुःख संसार से तारण आते हैं
सेवा ज्ञान ध्यान सत्संग से भक्त जनों को कृतार्थ करें
मानव धर्म का मर्म बताकर सत्य से नाता जोड़ प्रभु
कलियुग में सतयुग लाकर पुनः धर्म प्रतिष्ठा करते हैं ।।
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें