कविता लिखी नहीं जाती वह तो स्वत: ही लिख जाती है
भावनाएँ व्यक्त नहीं की जाती वह स्वमेव व्यक्त हो जाती हैं
समाज की दिशा तय नहीं की जाती वह पहले से ही निर्धारित होती हैं
प्रेम किया नहीं जाता जीवन की राहों में असमय प्रेम हो जाता है
जीवन काटा नहीं जाता बल्कि मुश्किलें जीना सिखा देती है
जहर पिया नहीं जाता बल्कि दो कङवे बोल विष पिला देते हैं
नम्रता सीखी नहीं जाती यह हमारे अंतर्मन में कस्तूरी सी छिपी होती है
महान बनने की कोशिश की नहीं जाती
अक्सर हमारे अच्छे कर्म हमें स्वत: ही महान बना देते है
मैं फिर से यही कहूँगी कि कविता लिखी नहीं जाती
वह तो स्वत: ही लिख जाती है....!!
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें