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त्योहारों का मौसम



त्यौहारों का ये मौसम जाने कितने गम दे जाता है

धरती अंबर के चादर में कुछ सिसके फूल हैं मुर्झाए से

चिथङे वस्त्र लपेटे तन पर पेट की ज्वाला दहक रही है

रहने को भी नहीं ठिकाना गली चौराहें बने बेगाने

ऐसे में क्या होली दिवाली वंचित वर्ग मना पाएंगे।


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