ए बंदे तू कब तक गुनाहों से मुंह मोड़ेगा , देख तेरे दिल के कोने में
उस रहबर का कड़ा पहरा है , तोलकर देख अपने गुनाहों का पलड़ा
जो नेकी पर भारी है , ऐ बन्दे , बदी से तोड़ दे नाता दिदार कर उसका
जो तेरे दिल के पर्दे में छुपा बैठा है , किस गफ़लत में सोया है तू कि
दोजख का सफर मौत से होकर तेरे बेहद करीब है , गर चाहता है
तू जन्नत ए सुकून तो अपने कौल को निभाने का वादा कर
फिर देखेगा तेरा खुदा बेशुमार रहमत से भरपूर
तुझे दुनिया के झूठे तिलिस्म से महफ़ूज रखेगा
उसकी मोहब्बत उसके नेक बंदों के लिए बेशुमार है
तू फिर भी झूठे रिश्तों में खुशियां तलाश रहा
जो तुझे कफ़न चढ़ाने तक ही साथ निभाएंगे
तब मौत के बाद क् सफर तुझे खुद तय करना है
जिस्म से रूह निकलने का दर्द ए सितम तुझे खुद सहना है
शैतानो क़ी डरावनी आवाजें सुन जब रूह कांप जायें तो
एक बार अपने खुदा को दिल से याद कर के तो देख
वो खुद आएगा तुझे ले जाने जन्नतें मुकाम पर
शर्त ये है कि तेरी बंदगी सच्ची हो
तब तू खुदा के बेशुमार मोहब्बत से भरपूर पायेगा
उसके आलम में तू खुद को महफ़ूज पायेगा।
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