जब दर्शन तेरा होता है मन करता है थम जाए पल
दीदार तुम्हारा करती रहूँ जिस पल में तूँ साक्षात खङा
मेरे चेतन सदगुरू का दीदार हुआ मेरे नयनो को सुकून मिला
गीता के कर्म व भक्ति योग का सर्वस्व पुण्य यहाँ प्राप्त हुआ
सतयुग आया त्रेता आया द्वापर तक कठिन तपस्या थी
अब कलियुग में अवतार हुआ मेरे हंस प्रभु का शुभागमन
अब जप तप साधन सरल हुआ जो समझ गया वो कृतार्थ हुआ
मैं करूण हृदय से नमन करूं तूने जन मानस को जगा दिया
तूने जन मानस को जगा दिया॥
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