दर्द का समंदर गर भरा हो तेरे सीने में
अपना दर्द किसी से भी बयाँ ना करना दुनिया में
नमक छिङकने की आदत है यही दस्तूर जमाने की
जाने किसी को क्या मिलता है व्यंग्य कटाक्ष से दुनिया में
टूट गए हौंसलो के पर तो परवाह नहीं कोई करता है
जीते जी गर टूट गए तो हार जाओगे दुनिया से
सफर बहुत अभी लंबा है अभी ना थकना राहों में
अपनी मंजिल को पाने का जत्न करो अभी दुनिया में
मत होना मायूस कभी भी अंधियारों में भी जलना
बनकर एक आशा का चिराग दुनिया को रौशन करना
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