फूलों पर नित भंवरा डोले ,
तितलियाँ आकर झूला झूलें
इन बागियों में उन बागियों में
सब मिल अपनी महक बिखेरें
फूलों पर हो इनका बसेरा
भँवरों का नित यूं गुनगुनाना
कलरव मधुर मधुर शब्दों की
धूप छांव में डोले हर पल
कैसा इनका है ये फसाना ,
भँवरों का बगिया में आना
हवा में जैसे इतर बिखेरे ,
बलखाते मदमाते डोलें
फूलों पर नित भंवरा...........
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