जब याद तुझे करती हूँ मैं गुणगान स्वयं हो जाता है
वो खुमार है तेरे नाम का प्रभु मेरा मन शीतल हो जाता है
झूठे प्रपंचो में फंसकर भटकाव भरी इस दुनिया में
कुछ पल भक्ति के मनकों को यह अंतःकरण सहेजे है
मिल जाएगा तूँ सहज उन्हें जो भाव हृदय का शुद्ध करे
हृदय के पट को खोल प्रभु तेरा नूर हृदय में दिखता है
दुखों की बदली छट जाए साक्षात्कार जो हो जाए
तुझे करूण हृदय से पुकारूँ तो झंझावट दूर हो जाते हैं
तेरी कृपा को पाकर हे प्रभुजी मेरा भाग्य उदय हो जाता है
जब याद तुझे करती हूँ मैं गुणगान स्वयं हो जाता है
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