न जाने कितने एैसे राज छिपे हैं इस जहाँ में ,इमारतों ,खंङहरों
धरा के हर एक कोने में इंसान के दिलो में
न जाने कितने...........
शक्ल से दिखते हैं चंद्रमुखी बातों से जैसे मिश्री घोलें
दिल है जिनका काली कोठरी परखना बहुत कठिन है
न जाने कितने...........
पढना चाहो मन के चित्रपट्ट को समझना चाहो इंसानी फिदरत को
सुना है चेहरा दिल का राज खोले ठहरो जरा!! यूँ ही एैतबार ना करना
न जाने कितने.........
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