महादिवस है पुण्य तेज है निर्लिप्त शिव ओंकार है।
योग अग्नि चैतन्यवरूप प्रभु जड़ चेतन में महाप्राण है ।।
मां गौरी शंभू भोले शिव शक्ति स्वमेव एकत्व रूप है ।
नर नारी किन्नर गंधर्व में अर्धनारीश्वर शिव ही श्रेष्ठ है।।
काल का तांडव महा भयंकर शिव ही महाकालेश्वर है।
नर्क द्वार यमदूत सताए भक्तों के आस त्रिलोकनाथ हैं।।
जटा पर गंगा चंद्र की शोभा ,मस्त मलंग अंतर्मुखी हैं।
असार जगत में स्वयंभू शिव महिमा तुम्हारी अपरम्पार है।।
डम डम डमरू त्रिशूल सुहाए नंदीश्वर बमबम भोले है ।।
क्रोध की अग्नि त्रिनेत्र खुले शिव का तांडव गजब शोले है ।।
सर्प गले में लिपटे हों जैसे परमसुंदरी आभूषण है।।
छाल पहन कैलाश विराजे चेले भयंकर अति विषधर है।।
पूजन भक्ति स्तुति करें ऋषि मुनि देव के वरदायक हैं।
भोले शंकर उमा भवानी मंगलकारी कष्टविनाशक हैं।।
भंग धतूरे स्वैग चढ़ाए नृत्य करें सब विवाहोत्सव है।।
सूर्य चंद्र निकटतम पूर्णिमा महाशिवरात्रि महाउत्सव है। ।
गायत्री शर्मा ' गुंजन '
स्वतंत्र लेखिका
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