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वसंत ऋतु (साझा काव्य संग्रह)



हे मां शारदे है नमन शारदे 
तेरा जन्मदिवस है वसंत शारदे ।
सूखे पत्ते झरे मन उदासी टरे  
इस संसार को जीवन प्राण दे ।।

भूलोक धरा पावन हो जहान 
इस धरा को हरियाली का वरदान दे ।
लहलहाए फसल चूमे कलियां चमन 
धरती वीरो को मां शारदे तार दे।।

तरुणाई भरी आम की  मंजरिया
पीली सरसो सजे जैसे दुल्हनिया।
मग्न कृषक जवान  खेत फुलवारियां 
मुस्काई धरा लेती अंगड़ाइयां।।

पीपल बरगद बढ़े  महुआ टपटप झरे 
सारे संसार का सर्व अमंगल टरे।
झरने पर्वत की कलकल धारा  बहे 
तेरे वंदन से ऋतुराज मंगल करें।।

विद्या धन यश मिले कीर्ति चन्हू दिस बढ़े 
चतुर्दिशाओं  में कलरव  गुंजन रहे ।
वसंतोत्सव की मुस्कान अधर खिले 
मन मस्तिष्क प्रफुल्लित रहे शारदे ।।

©®
गायत्री शर्मा गुंजन 
स्वतंत्र लेखिका
दिल्ली प्रदेश

साझा काव्य   संस्कार न्यूज राष्ट्रीय द्वारा  ' काव्य संगम ' में प्रकाशित 
पुस्तक का लिंक
https://sansnews.com/?page_id=4825

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