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जीवन की धूपछाँव

धूप छांव से आच्छादित यह जीवन एक पहेली है तरूवर नदियाँ सागर अंबर सबकी यही कहानी है प्रकृति आभूषण बन करके निज वसुधा का श्रृंगार करें राह थके पथिकों के लिए प्रकृति आश्रय स्थान बने पक्षियों का मधुर कलरव सुरों का संगम बन जाए हर्ष शोक व्याकुलता भूलकर पथिक प्रफुल्लित हो जाएँ धूप छांव से आच्छादित यह जीवन एक पहेली है गायत्री शर्मा

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