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जीवन एक कोरा कागज़

 सोचती हूँ कुछ लिख ङालूँ

जो भी है दिल में  दफन

जिंदगी के कोरे कागजों पर
आंसुओं की स्याही से

देखूँ तो जरा एैसा क्या है खास
 दर्दे दिल बयाँ कर शायदमिलता हो सुकून? ? ?

ङरती हूँ कहीं मेरा रूदन सुन
तुम पर भी सिलवटें ना पङ जाए

शायद रंग भरने की चाहत में
यह कागज कोरा ही रह जाए!

"गायत्री शर्मा" 

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