सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

दशहरा पर्व

दशहरा खुशी का पर्व है
इस  दिन खुल जाते हैं सभी
मुक्ति के दस दरवाजे 
दस रावण छिपा बैठा है 
मानव तन के भीतर 
आज चहुं ओर दिशा में
 रावण का प्रतीक जला
 खुशी से हम सब झूमें नाचें
  छण भर के आतिशबाजी में 
ध्वस्त हुआ रावण प्रतिमा
 वाह कितना आनन्द आया
धू धू कर प्रतिमा जलना
काश कि इतना आसान होता 
 मानव के अन्तस् में छिपे 
आवेश द्वेष घृणा और 
अहंकार का प्रतीक 
 रावण को मिटाना! 
 गायत्री शर्मा

टिप्पणियाँ