स्वप्न न जाने क्यों आते हैं
कुछ अच्छे कुछ बुरे होते हैंकभी जख्मों को कुरेद रहे
कुछ यादों को संजोये हुए
स्वप्न न जाने क्यों आते हैं
देखती हूँ जब बंद आँखो से
जागृत अवस्था में याद नहीं
उलझा देते हैं ये कभी भी
मन पर किसी का जोर नहीं
स्वप्न न जाने क्यों आते हैं
कुछ खट्टी कुछ मीठी यादें
असमय याद आ जाते हैं
प्रात:काल के स्वप्न भी
कभी हकीकत बन जाते हैं
स्वप्न न जाने क्यों आते हैं
"गायत्री शर्मा"
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