सिमित शब्द है जोङकर जिनसे
लिखते हैं हर रोज नया
हम सब अपने किस्सों कोजीवन के हर हिस्से को
भूत भविष्य वर्तमान को
सिमित शब्द हैं जोङकर जिनसे
लिखते हैं हर रोज नया
दर्द से भरी दास्तानों को
खुशियों की सौगातों को
सपनो से सजे अरमानों को
सीमित शब्द हैं जोङकर जिन
सेलिखते हैं हर रोज नया
कोयल सी मीठी तानों को
अश्रु के बहते सागर को
कुछ कही अनसुनी बातों को
सिमित शब्द हैं जोङकर जिनसे
लिखते हैं हर रोज नया
"गायत्री शर्मा"

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