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दर्द की जुबान



 दर्द की जुबान नहीं होती

महसूस कर देख लो तुम
 कांच की तरह बिखर जाओगे
क्या खुद को संभाल पाओगे तुम
दर्द कभी बयाँ नहीं  होता
रूदन स्वर  से चीख उठता है दिल
कुरेदकर देख लो तुम गमों को
नासूर से वो कम  नहीं होता
!"गायत्री शर्मा"

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