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कृष्ण लीला

बाल रूप मोरे मन भावा अति सुंदर मनमोहन प्यारा मनमोहक तेरी छवि निराली बंसी की धुन वो कदंब की ङारि बाल- ग्वालों संग झुंङ बनाकर नंद की नगरी में उधम मचावे निगुणा भी तेरा रूप निहारे माखनचोर पर बलि बलि जावे गायत्री शर्मा

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