चाहत है कि बदले समाँ
बदलेगा ये सारा जहां
हो प्रेम हर घट में सदा
नहीं द्वेष भाव का स्थान हो
जुल्म की कोई बात न हो
हर शख्स धर्म का रूप हो
मेरी कल्पना की दुनिया में
ऐसा कोई साम्राज्य हो
!गायत्री शर्मा
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