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जुगनू

जुगनू भी कितने कमाल करते हैं अंधेरी रातों में हमें गुमराह करते हैं चीर अंधेरा आगे आगे बढते जाते हैं पीछे पीछे हम उनके दौङे जाते हैं ले जाते हैं दूर कहीं घनघोर घटाओं में छोङ अकेला साथ हमारा गुम हो जाते हैं पलक झपकते वे अंधेरों में छिप जाते हैं ऐसा लगता है मानो वो राह दिखाते हैं गायत्री शर्मा

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