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कवि का कोमल हृदय

 


सुना है मैने कविहृदय में

कोमल मृदुल कोना होता है
दिल की बात सहज ही वह
पंक्तियों में बयाँ करता है
खट्टी मीठी हर लमहों को
स्मृतिपटल में संजोता है
 जीवन की यात्राएँ सभी
और व्यथा हर इंसान की
विधाता की सुंदर रचना
शब्द अलंकृत बयाँ करता है
 कोमल कोमल भावों का
वर्णन जाने कैसे करता है
जिस भी रूप मे जैसा चाहो
वैसा ही वह ढल जाता है
सुना है मैने कवि हृदय में
कोमल मृदुल कोना होता है

गायत्री शर्मा

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