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मुश्किलों का सामना

क्यों आती हैं बाधाएँ जीवन में क्यों ये कदम लङखङा जाते हैं क्षण भर तनहा पाकर खुद को व्याकुल मन क्यों हो जाता है चाहतें क्यो कभी खत्म ना होती पाकर सारे जहाँ की खुशियाँ फिर भी उदासी ओढे हुए हैं टूटकर बिखर ना जाना कहीं अश्क भी आँखो मे न ठहरते कैसे संभालकर गम रखोगे सोचो जरा इस क्यों के पीछे हम ही कारण क्यों होते हैं गमों को अपने भूल कर तुम हंसते हुए बाधाएँ पार करो "गायत्री शर्मा"

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