क्यों आती हैं बाधाएँ जीवन में
क्यों ये कदम लङखङा जाते हैं
क्षण भर तनहा पाकर खुद को
व्याकुल मन क्यों हो जाता है
चाहतें क्यो कभी खत्म ना होती
पाकर सारे जहाँ की खुशियाँ
फिर भी उदासी ओढे हुए हैं
टूटकर बिखर ना जाना कहीं
अश्क भी आँखो मे न ठहरते
कैसे संभालकर गम रखोगे
सोचो जरा इस क्यों के पीछे
हम ही कारण क्यों होते हैं
गमों को अपने भूल कर तुम
हंसते हुए बाधाएँ पार करो
"गायत्री शर्मा"
शब्द गुँजन में आप सभी पाठकगणों का हार्दिक स्वागत है । यहाँ प्रकाशित समस्त लेख , कहानी, कविता, मुक्तक, गीत, आध्यात्मिक अभिव्यक्ति , मनोविज्ञान , परामनोविज्ञान आदि समस्त शाखों से जुड़े तथ्य , रहस्य , मेरी स्वरचित स्वतन्त्र अभिव्यक्ति है जिस पर मेरा मौलिक अधिकार है। अतः पाठकों से निवेदन है कि किसी भी तरह कंटेंट्स को तोड़ मरोड़कर अन्यत्र पेश ना करें । अन्यथा दोषी पाए जाने पर कॉपीराइट एक्ट के तहत आप पर कार्यवाही की जाएगी । गुंजन अभिव्यक्ति को अपना बहुमूल्य समय देने के लिए आप सभी का धन्यवाद!!
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें