★ सुंदरता पर
सुंदर तन का आभूषण , बाह्य सौंदर्य निखारे
स्वच्छ मन का प्रतिबिंब , जीवन अनमोल बनाये।।
★माफी पर
माफी शब्द मिटा देता है ,इंसान की हर गलती को
आज यही हथियार बना है , नकाबपोश कुछ चेहरों का।
★गमों पर
रिश्ते नाते सब झूठे हैं और झूठा है ये संसार
दो पल की खुशियां है जहाँ में बाकी गमों का है सैलाब।।
★ जमाने पर
बदल रहे हैं हम बदल रहा है जमाना
किससे क्या उम्मीद करें यह समझ रहा है जमाना।।
◆ खुद का विश्लेषण
कितनी आसानी से हम दूसरों की गलतियों को ढूंढ निकलते हैं
काश की उतनी ही बारीकी से अपनी गलतियों का निरीक्षण कर पाते ।।
★ सद्भावना पर
दिलों में तकरारें और आपस में ये दरार
जैसे दो बर्तन आपस मे करते हैं झंकार
मिट जाना है वजूद हमारा क्यों करते अभिमान
आपस मे मैत्री भावों का करते चलो संचार ।।
★ मंजिलों पर
मंजिलों तक पहुंच गर इतना आसान होता
तो जीवन में संघर्षों पर पूर्ण विराम होता ।।
★ हुस्न के अहम पर
अजब जमाना का है तमाशा हर एक शख्श का नया बहाना
हुस्न ए सूरत राख हो जाना , फिर क्यों इतराना , बलखाना।।
★अहंकार पर
अहम की फसलें जो काट ना सका
संस्कारों की उपज वो समझ ना सका।।
★ विवशता पर
हमारी समर्थता वहीं तक है जहाँ तक ईश्वरीय अनुमति है।।
★प्रकृति पर
प्रकृति का कहर जितना भयावह है ,उतना ही रोमांचक उसका संतुलित दृश्य।।
★शांति पर
चैन ओ सुकून गर रास आता जहाँ में ,तो नहीं होता सरेआम कत्लेआम इस जहाँ में ।।
★जिंदगी पर
बयाँ करूँ खुशी को या दर्दे नशे में मैं फिरूँ
ऐ जिंदगी तेरी पगडंडी पर किस ओर मैं चलूं ।।
★ शब्दों पर
शब्दों की सीमाएं, शब्दों का ही जाल ,
मूक अवाक निरंतर , कभी शब्द अविराम।।
★ सावन पर
मौसम ए बाहर, उमंगो की फुहार
हरियाली संग लाया , सावन की बरसात।।
★समाज सेवा पर
कुछ शख़्सियतें ऐसी देखी है मैंने जो चुनते हैं खुद के लिए मुश्किल राहें , और कर देते हैं आसान औरों का जीवन ।।
★ राजनीति पर
हदें जब पार हो तो दुस्साहस मान लिया जाता है
नेता जब भ्रष्ट हो तो देश का बुरा वक्त मान लिया जाता है
कानून की देवी शायद इसलिए अंधी होती है कि
जब वक्त आये अपने ही प्यान्दो के निर्णय का तो
सब रिश्ते नाते तोड़ इंसाफ़ का पक्ष रखती है ।।
★विश्वयुद्ध पर
इतिहास बना साक्ष्य बने, कृष्ण अर्जुन संवाद बना
महाभारत का भीषण युद्ध , कलिंग नरसंहार हुआ
विश्व युद्ध महाशक्ति प्रदर्शन, द्विध्रुवीयता विकराल बना
तृतीय विश्वयुद्ध गड़ी नजर है महाशक्तियां टकराने को
बदलते परिप्रेक्ष्य को देखें , इतिहास पुनः दोहराने को
खूनी क्रांति पृष्ठों में छपकर , मानवता चित्कार रही है
हर एक युग में युद्ध चुनौती , क्रम कभी थम ना पायेगा।।
★बिखरे रिश्तों पर
भरोसे की मजबूती के लिये सब्र का इम्तिहान जरूरी है
अपना पक्ष रखने के लिए सलीके से पेशगी जरूरी ही
तमाम हो मुश्किलें लेकिन रिश्तों का साथ जरूरी है
बिखरे सम्बन्धों में मधुरता का एहसास जरूरी है ।।
★रूढ़ियों पर
बेटियों को आगे बढ़ते देख नहीं सकते , संस्कारो की उपज को वे समझ नहीं सकते
बड़े नादान हैं वे लोग जो करते हैं बड़ी बातें , वाकई बड़ा बनने के लिए छोटी बातें अपना नहीं पाते।।
★अध्यात्म पर
भरोसे का आधार क्या है , तेरी रहमतों में पैगाम क्या है
जान लिया जिसने अमरत्व का मार्ग , दुनिया से उसका सरोकार क्या है ।।
★ जज्ब पर
शिरकत करते हैं हम गुपचुप अंदाज में , बहुत हो गया अब रुदन , अब देखोगे हमें खुशमिजाज में।।
★ देश पर
दौलत का गुमान , कुर्सी की आन
दोनों से बढ़कर , मेरे देश की शान।।
★ दोस्ती पर
कैसे परखें कौन है सच्चा , जो गमखवार हमारा है
बहुत कठिन है इस दुनिया में सच्चा मित्र सहज मिलना।।
★रिश्तों पर
नाराजगी का कारण कोई तो पूछे , रिश्तों की अहमियत कोई तो जाने
उलझनें तमाम होंगी जीवन में , रिश्तों को संवारना कोई तो जाने।।
पूर्णतः मौलिक
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