पद में फूलो नहीं मद में अकड़ो नहीं
जिंदगी जो मिला सत्य भूलो नहीं
माटी का देह माटी में मिल जायेगा
ये जनम जो मिला कुछ कर्म कर भला
जिंदगी जो मिला सत्य भूलो नहीं
माटी का देह माटी में मिल जायेगा
ये जनम जो मिला कुछ कर्म कर भला
क्या रखा है फिजुली की रंजिशों में
मन में छल हो भरा ,बोल मीठे कहें
दोहरा चित्र मानवता का क्यों है भला
सत्य को जानकर भी वहीं है अड़ा
बात करते हैं हम मैत्री सद्भाव की
तो फिर क्यों है दिलों में ये रंजिश भला
सोचो मंथन करो अपना अभिमान छोड़
बात अपनी रखो बोल टेढ़े न हों
प्रेम सबसे करो न कि षड्यंत्र हो
मीठे बोलो से मन को न घायल करो
वास हर दिल में है प्रभू श्री हरि का
मिलके रहना जहाँ में मैत्री भाव से।
न मिलेगा जनम फिर से चौरासी में
तर जाओगे जीवन की वैतरणी से ।।
मन में छल हो भरा ,बोल मीठे कहें
दोहरा चित्र मानवता का क्यों है भला
सत्य को जानकर भी वहीं है अड़ा
बात करते हैं हम मैत्री सद्भाव की
तो फिर क्यों है दिलों में ये रंजिश भला
सोचो मंथन करो अपना अभिमान छोड़
बात अपनी रखो बोल टेढ़े न हों
प्रेम सबसे करो न कि षड्यंत्र हो
मीठे बोलो से मन को न घायल करो
वास हर दिल में है प्रभू श्री हरि का
मिलके रहना जहाँ में मैत्री भाव से।
न मिलेगा जनम फिर से चौरासी में
तर जाओगे जीवन की वैतरणी से ।।
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