वो विधाता है जिसनें दिया सुन्दर तन
और मन में बसा वोही खुद को छुपा
गर मुकद्दर जगे भाग्य में हो गुरु
उनकी शरणागति से प्रगट हों प्रभू।।
गायत्री शर्मा
और मन में बसा वोही खुद को छुपा
गर मुकद्दर जगे भाग्य में हो गुरु
उनकी शरणागति से प्रगट हों प्रभू।।
गायत्री शर्मा
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