प्रेम क्या है मैं शब्दों में कैसे कहूँ , प्रेम ह्रदय में है ब्यक्त कैसे करूँ
प्रेम शबरी के जूठे बेरों में छिपा , दशरथनंदन के भाव मे प्रगट हुआ
प्रेम मीरा ने की वो दीवानी बनी, गिरधर गोपाल को प्रेम के वश किया
प्रेम ध्रुव नें किया ध्रुव तारा बना, श्री हरि को धरा पर प्रगट कर दिया
प्रेम प्रेमियों ने की है ,प्रभु हंस से जीते जी मुक्ति मार्ग सहज मिल गया ।।
प्रेम शबरी के जूठे बेरों में छिपा , दशरथनंदन के भाव मे प्रगट हुआ
प्रेम मीरा ने की वो दीवानी बनी, गिरधर गोपाल को प्रेम के वश किया
प्रेम ध्रुव नें किया ध्रुव तारा बना, श्री हरि को धरा पर प्रगट कर दिया
प्रेम प्रेमियों ने की है ,प्रभु हंस से जीते जी मुक्ति मार्ग सहज मिल गया ।।
गायत्री शर्मा
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