दरिया जैसा दिल है तेरा ,सूरज जैसा मुखड़ा है
चाँद, सितारे गगन की शोभा, तेरी शोभा न्यारी है
धरती का श्रृंगार हो उपवन, पुष्प सुसज्जित चरण तेरे
अत्याचारी दुनिया में प्रभु, तू करुणा की मूरत है
करुनानिधान करो किरपा, तुम बिन कौन सहायक है।।
गायत्री शर्मा
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चाँद, सितारे गगन की शोभा, तेरी शोभा न्यारी है
धरती का श्रृंगार हो उपवन, पुष्प सुसज्जित चरण तेरे
अत्याचारी दुनिया में प्रभु, तू करुणा की मूरत है
करुनानिधान करो किरपा, तुम बिन कौन सहायक है।।
गायत्री शर्मा
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