दर्द विलाप शोक चिंता से ,क्रंदन उचित नहीं होता
झूठे मान बड़ाई से ,जीवन गुलजार नहीं होता
कुशल ज्ञान उत्तम वाणी से ,मुमकिन है विदूषक बनना
पर उत्तम और श्रेष्ट वही जो, मानवता खातिर मिटाता ।।
गायत्री शर्मा
झूठे मान बड़ाई से ,जीवन गुलजार नहीं होता
कुशल ज्ञान उत्तम वाणी से ,मुमकिन है विदूषक बनना
पर उत्तम और श्रेष्ट वही जो, मानवता खातिर मिटाता ।।
गायत्री शर्मा
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