अष्टप्रहर हो तेरा प्रभु जी , ध्यान लींन मन मेरा हो
रुनझुन बाजे नाद ध्वनि प्रभु, तेरा दीदार ह्रदय में हो
माया के चित्त जोर से देखो ,जीव चराचर भटक रहा
आवागमन का चक्र छुड़ाकर ,पार लगा दो भवसागर।
गायत्री शर्मा
रुनझुन बाजे नाद ध्वनि प्रभु, तेरा दीदार ह्रदय में हो
माया के चित्त जोर से देखो ,जीव चराचर भटक रहा
आवागमन का चक्र छुड़ाकर ,पार लगा दो भवसागर।
गायत्री शर्मा
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