कुटिल, कटु वचनों से मानव ,मानव को छल जाता है
अपराधों के आड़ में जो ,उठकर फनकार लगाता है
ऐसे विषधर मनुज पवित्र ,धरा का भार हो जाते हैं
कुचल दो ऐसे फनों को जो ,मानव के अहित में उठता है
गायत्री शर्मा
आजादी
जिन्ना के महत्वकांक्षाओं के घाट चढ़ गए
पुरखों की जमीं छोड़ पाकिस्तान चल पड़े
आजादी तो मिली थी हमको हाँ कुछ इस तरह
कि बंटवारे के इस दर्द को नासूर कर चले ।।
Gayatri sharma
अपराधों के आड़ में जो ,उठकर फनकार लगाता है
ऐसे विषधर मनुज पवित्र ,धरा का भार हो जाते हैं
कुचल दो ऐसे फनों को जो ,मानव के अहित में उठता है
गायत्री शर्मा
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