सुख दुःख हार लाभ हानि का ,हर एक पक्ष उभरता है
अहंकार अभिमान उत्कृषटता ,मानव को लोभी कर दे
जब भी तुम्हारे सौम्य ह्रदय को, कुटिल प्रभाव विवश कर दे
क्यों न हम हर पीर पक्ष के, पावों को पंगु कर दें।
गायत्री शर्मा
अहंकार अभिमान उत्कृषटता ,मानव को लोभी कर दे
जब भी तुम्हारे सौम्य ह्रदय को, कुटिल प्रभाव विवश कर दे
क्यों न हम हर पीर पक्ष के, पावों को पंगु कर दें।
गायत्री शर्मा
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें