चार पहर की बात निराली श्रुति,सज्जन, कहें वेद पुराण
दुःख रोग विनसे सब तेरे , उस पर प्रसन्न हो कृपानिधान
कभी न आए बला ,ब्याधि , और ना आये अकाल ही काल
सुखद हो जाए अंतिम छण भी, जो स्वांसों में ले तेरा नाम।।
गायत्री शर्मा
दुःख रोग विनसे सब तेरे , उस पर प्रसन्न हो कृपानिधान
कभी न आए बला ,ब्याधि , और ना आये अकाल ही काल
सुखद हो जाए अंतिम छण भी, जो स्वांसों में ले तेरा नाम।।
गायत्री शर्मा
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