ना घात करना राष्ट्रद्रोहों जागो अबकी बार
इस देश की मिट्टी के हम कण कण हैं कर्जदार
कुचले फनों को विषधरों को राष्ट्र के जवान
बापू की जन्मभूमि है ये देश है गुलजार
ना घात करना राष्ट्रद्रोहों .....
जहां जन्मे पटेल तांत्या टोपे लाल बाल पाल
सेल्युलर जेलों का काला पानी थी वीभत्सना
दृढ़ राष्ट्रवादी नौजवां भगत ने त्यागे प्राण
भारत का गांव गांव और शहर है बेमिसाल
ना घात करना राष्ट्रद्रोहों.....
स्वतंत्रचेतना जनजागरण उदघोष से
राष्ट्र वाद भाव प्रेरित राष्ट्र कवियों से।
सोनेकी चिड़िया आज बेड़ियों से मुक्त है
जिसके बचाव में लगा था पूरा हिंदुस्तान
ना घात करना राष्ट्रद्रोहों.....
पुष्प की अभिलाषा हो या इंकलाब स्वर
खदेडे थे उन गिदड़ों को भारती के लाल
निर्भय हो दुर्ग लांघे 'गुंजन' दर ओ दिवारें
असंख्य बलिदानों की गाथा मेरा हिंदुस्तान।।
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