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प्राण बिना शरीर

  

भावों के अनेक रूप हैं , क्रोध ईष्र्या प्रेम है

विभिन्न रूपों में होती है व्यक्त , बाह्य रूप से हृदय तल् तक

एक गहरा प्रभाव डालती हैं कभी आघात तो कभी करुण भाव जगाती

ये भाव जाने कैसे गुलजार हैं अभिव्यक्ति का एक एहसास है 

जिसके बिना जीवन कुछ भी नहीं , वेदना नहीं संवेदना नहीं  तो केवल 

रह जाता है पंचत्व जिसमें कोई एहसास नहीं , मृत शरीर का कोई भाव नहीं

अनेक रूपों में व्यक्त ये भावों का दरिया , निज प्राण बिना कुछ भी नहीं।


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