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अंतरात्मा की आवाज़

 

 जाने क्यों ऐसा लगा खींच रहा है कोई मेरे मन की ङोर

दिल पर काबू नहीं सोच भी प्रभावित हुए बिना नहीं

जैसे लगता है कोई प्रभाव छोङ गया हो

हर पल खुद को गिरते और संभलते हुए पाया

एक नई दिशा की ओर मेरे कदम निरंतर बढते गए

तब मुझे एहसास हुआ वह कोई और नहीं

जिसे मैने अनदेखा व अनसुना किया

बल्कि मेरी ही अंतर्आत्मा की आवाज थी

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