जुगनू भी जाने कितने कमाल करते हैं
अंधेरी रातो मे हमें गुमराह करते हैं
ले जाते हैं दूर कहीं घनघोर घटाओ में
छोङ अकेला साथ हमारा गुम हो जाते हैं
पलक झपकते आखों से ओझल हो जाते हैं
ऐसा लगता है मानो हमें राह दिखाते हैं
शब्द गुँजन में आप सभी पाठकगणों का हार्दिक स्वागत है । यहाँ प्रकाशित समस्त लेख , कहानी, कविता, मुक्तक, गीत, आध्यात्मिक अभिव्यक्ति , मनोविज्ञान , परामनोविज्ञान आदि समस्त शाखों से जुड़े तथ्य , रहस्य , मेरी स्वरचित स्वतन्त्र अभिव्यक्ति है जिस पर मेरा मौलिक अधिकार है। अतः पाठकों से निवेदन है कि किसी भी तरह कंटेंट्स को तोड़ मरोड़कर अन्यत्र पेश ना करें । अन्यथा दोषी पाए जाने पर कॉपीराइट एक्ट के तहत आप पर कार्यवाही की जाएगी । गुंजन अभिव्यक्ति को अपना बहुमूल्य समय देने के लिए आप सभी का धन्यवाद!!
जुगनू भी जाने कितने कमाल करते हैं
अंधेरी रातो मे हमें गुमराह करते हैं
ले जाते हैं दूर कहीं घनघोर घटाओ में
छोङ अकेला साथ हमारा गुम हो जाते हैं
पलक झपकते आखों से ओझल हो जाते हैं
ऐसा लगता है मानो हमें राह दिखाते हैं
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