मौसम के बहार में , खुशियों की फुहार है
आग सी लगी जो दिल, फिर भी बेदार है
महकते गुलाब सी, महकती ये जिंदगी
कुछ नये से ख्वाब से , जिंदगी गुलजार है
मोम सी पिघल रही, पीर की घनी सिल्ली
आज इन फिजाओं में ,रंगों का बहार है।।
शब्द गुँजन में आप सभी पाठकगणों का हार्दिक स्वागत है । यहाँ प्रकाशित समस्त लेख , कहानी, कविता, मुक्तक, गीत, आध्यात्मिक अभिव्यक्ति , मनोविज्ञान , परामनोविज्ञान आदि समस्त शाखों से जुड़े तथ्य , रहस्य , मेरी स्वरचित स्वतन्त्र अभिव्यक्ति है जिस पर मेरा मौलिक अधिकार है। अतः पाठकों से निवेदन है कि किसी भी तरह कंटेंट्स को तोड़ मरोड़कर अन्यत्र पेश ना करें । अन्यथा दोषी पाए जाने पर कॉपीराइट एक्ट के तहत आप पर कार्यवाही की जाएगी । गुंजन अभिव्यक्ति को अपना बहुमूल्य समय देने के लिए आप सभी का धन्यवाद!!
मौसम के बहार में , खुशियों की फुहार है
आग सी लगी जो दिल, फिर भी बेदार है
महकते गुलाब सी, महकती ये जिंदगी
कुछ नये से ख्वाब से , जिंदगी गुलजार है
मोम सी पिघल रही, पीर की घनी सिल्ली
आज इन फिजाओं में ,रंगों का बहार है।।
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