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कुदरत

 

मौसम के बहार में , खुशियों की फुहार है

आग सी लगी जो दिल, फिर भी बेदार है

महकते गुलाब सी, महकती ये जिंदगी

कुछ नये से ख्वाब से , जिंदगी गुलजार है

मोम सी पिघल रही, पीर की घनी सिल्ली

आज इन फिजाओं में ,रंगों का बहार है।।

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