बचपन बीता खेल खेल में दोस्तों के संग धूम मचाना
आज भी वो पल याद है होम वर्क पूरा न करने का
हम रोज नए बहाने ढूंढते स्कूल में टीचर घर में माँ
दोनो मिलकर ङंका बजाते तब हम प्यारे मासूम बच्चे
रूठकर उनसे बात न करते अधूरे काम को पूरा करते
मौका पाकर फुर्र हो जाते नील आसमाँ की ओर दौङते
बचपन की वो धुंधली यादें जहन में आज भी जिंदा है
विद्यार्थी और शिक्षक का देखो कितना गहरा रिश्ता है
आओ मिलकर आज सभी अपने गुरूजनों को याद करें
उनके प्रदत शिक्षा पर चलकर हम नित्य निरंतर बढते जाएँ
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