किसका नाम लूँ किसे बदनाम करूँ
सभी तो तेरे बंदे हैं चाहे अच्छे या बुरे हैं
जो भी हो तू कितना उदार है
हम सब पर तू कितना मेहरबान है
एक अच्छाई ही देखता है तूँ
हजार गलतियाँ माफ करता है तूँ
तुझ सा इस जहाँ में कौन होगा
जो इतना उदार और विनम्र होगा
फिर ये क्यों ना सोचूँ कि मैं किसी को माफ करूँ॥
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