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मृत्यु


पत्ते ङाल से टूटकर जाने किस ओर गए

कि दिशाओं को खबर नहीं कहाँ खो गए

सूर्ख भी नहीं हुए कि कह सकें टूट गए 

शायद वे फिर लहराएंगे किसी शाख पर 

खुशी है कि वो पत्ता हंसते हुए शाख से जा गिरा

फक्त दुख इस बात का वो वक्त से पहले चल चला॥


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