कुछ क्षण के लिए सोचती हूँ कि अपनी अभिव्यक्ति को समेट लूँ
विचार व्यक्त ही ना करूं परंतु.............
विचार और अभिव्यक्ति ही हमें जीवन के हर पहलू से अवगत कराते हैं
जीवन जीने की कला सिखाते हैं
भावनाएँ व्यक्त कर विचारों का आदान प्रदान करते हैं
एवं नवीन विचारों का सृजन करते हैं
तो कैसे मैं अपनी अभिव्यक्ति को समेट लूँ
कदापि नहीं .... ............
यही तो पशु एवं मनुष्य में अंतर करना सिखाते हैं
असभ्य से सभ्य समाज की ओर मोङते हैं
बुराई से अच्छाइ की ओर हम निरंतर गतिशील रहते है
ये विचारों की स्वतंत्र अभिव्यक्ति का ही प्रभाव है
जिससे सुंदर साहित्य जगत का निर्माण हुआ!!
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