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कवि हृदय का कोमल कोना

 

सुना है मैने कविहृदय में कोमल मृदुल कोना होता है

दिल की बात सहज ही वह पंक्तियों में बयाँ करता है

खट्टी मीठी हर लमहों को हृदयपटल में संजोता है

जीवन की यात्राएँ सभी और व्यथा हर इंसान की

विधाता की सुंदर रचना शब्दालंकार बयाँ करता है

कोमल कोमल भावों का वर्णन जाने कैसे करता है

जिस भी रूप मे जैसा चाहो वैसा ही वह ढल जाता है!

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