मेरी चाहत है मिले साथ तुम्हारा ,
अपनो का मिला मुुझे साथ तो क्या
मैने देखा है नेमत सिर्फ तुम्हारा
अपनो का मिला मुुझे साथ तो क्या
मैने देखा है नेमत सिर्फ तुम्हारा
दुख दर्द में जब् कोई आगे आया
उस शख्स् को मैंने फरिश्ता माना
पूर्ण किया हर काज को तुमने
इच्छा अधिक न रही है मन में
क्या कर्म दिखा मुझमें मेरे मौला
हर वक्त तुझे मैंने करीब पाया
हर वक्त तुझे मैंने करीब पाया
एक एहसास है तू कोई शून्य कहे
त्रिनेत्र जो खोले वह प्रत्यक्ष कहे
निज रूप है क्या ब्रम्हज्ञानी कहे
नादान तुझे निराकार कहें
मूर्ति पूजन कोई सत्य कहे
जंजाल कर्मकांडी ये कहें
वह मूढ़ मति कोई क्या समझे
निराकार ब्रम्ह का प्रागट्य करें
चैतन्य प्रभु की भक्ति को तरसें
त्रिदेव नारद और सनकादिक
नर तन देवहुँ एक बार प्रभु
मोक्ष मार्ग का है तन साधन
मोक्ष मार्ग का है तन साधन
कहे नानक जन है बड़भागी
मानुष जन्म सौभाग्य मिला
धन्य है जिसने नर तन पाया
आदि नाम वह गुप्त है जिसको
कृपा कर तुमने हृदय में लखाया
बड़भागी मैने साकार को पाया
साकार ब्रम्ह पर बलि बलि जॉउ
सत्य वचन कहें वेद वेद पुराण
राम बुलावा भेजिया , दिया कबीर रोय
जो सुख साधु संगत में सो बैकुंठ न होय।।
जो सुख साधु संगत में सो बैकुंठ न होय।।
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