भंवर में फंसी नैया मेरी , प्रभु जी मेरे पार लगाना
मन में दृढ़ विश्वास हो मेरे , हरि काल चक्र से मुझे छुड़ाना
डूबते सूरज सा यह जीवन , ज्ञान पुंज से रौशन करना
क्या मांगू वर जग का तुमसे ,तुम हो सर्व कला का ज्ञाता
भक्तों के हो प्राण आधारा , कल्पतरु मन मांहि समाये
अंतिम मन कि अभिलाषा है, निकट मृत्यु समीप खडी हो
ध्यान लीन लवलीन हो मेरा , सुखद विदाई अंतिम क्षण हो।।
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