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प्रणय प्रेम हृदय में

प्रणय प्रेम हृदय में रखकर ,दृढ़ विश्वास बनाये रखना
आत्मदाता के श्री चरणों में , सादर  शीष झुकाए रखना
कटुक वचन सुनकर जीवन में ,  धैर्य कभी ना खोने देना
निष्कपट भावो से जीवन में सद्कर्म को अपनाना 
यही प्रेम है यही समर्पण , सद्भावना को बल देना।।

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