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हरि भक्ति गर करना चाहो

हरि भक्ति गर करना चाहो, तन मन धन के मोह को त्यागो
प्रेम किया है  प्रभु जी से तो ,मीरा ,ध्रुव ,प्रह्लाद भक्त सा
दुख सहने की क्षमता रखो....
भक्ति मार्ग अति सहज नहीं है ,नित्य प्रयास से सुगम करो
संशय नहीं है भक्ति में जिसके , आवागमन चक्र से प्राणी
प्रभु  कृपा से पार हो जाता है.....
नदियाँ ज्यों ही समुद्र में मिलकर , अस्तित्व समुद्रमय करती हैं
तब नाम हो गंगा या कावेरी , अनंत में अनन्त कहाती हैं
ऐसे प्राणी निज धाम पहुंचकर अमर अलौकिक सत्ता के दुर्लभ साम्राज्य को पाता है.....

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