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तेरी रहमतों का पैगाम

जो महसूस करता है दिल मेरा, उस आभास को मैं लिख दूँ
तेरे संग आत्मीयता का जुड़ा एहसास मैं  लिख दूँ
तेरी  रजा में समानता का व्यवहार मैं लिख दूँ
शब्दों की सीमाओं को तोड़ तेरा गुणगान मैं लिख दूँ
बेअंत तेरी ताकत के आगे नतमस्तक जहाँ लिख दूँ
मेरी पहचान तुझसे है तुझे बेमिसाल लिख दूँ
दुनिया के साजिशों के बीच दरिया सा दिल तेरा लिख  दूँ
सुर में तूँ संगीत में त्रिवेणी धार संगम लिख दूँ
मेरी औकात तो कुछ भी नहीं तेरी खूबियाँ सारी लिख दूँ
तुझे उन फरिश्तों  में खास लिखूं  कण कण में तू बसा लिखूं
इंसानियत पर  मिटने वालों को , तेरी रहमतों का सुंदर पैगाम लिख दूँ।।

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